Skip to main content

बंगाली दुल्हन और बॉलीवुड

चाहे टसर साड़ी हो, या लाल बार्डर और सफेद रंग  साड़ी हो, या कॉटन साड़ी हो बंगाल की साड़ी पहनने के अनुठे स्टाईल से महिलाएं प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाती है। रही बात बंगाली दुल्हन की तो उसकी तो शोभा ही निराली होती है. हम अपने ब्लॉग के माध्यम से बॉलीवुड की उन बालाओं का जिक्र करना चाहेंगे, जो बंगाली दुल्हन के लुक में लगी बेहद सुंदर।
फ़िल्म "गुंडे" में दुल्हन के रुप में प्रियंका ने लाल रंग की बनारसी साड़ी के साथ पफ बाहों वाला ब्लाउज पहना था सोने के गहनों ने उनकी शोभा बढ़ा दी थी।

Image source:stylewhack.com


फ़िल्म "विकी डोनर" में माथे पर मुकुट सजाए यामी बंगाली दुल्हन के रुप में काफी सुंदर लगी। बंगाली दुल्हन की आखों को विशेष रुप से सजाया जाता है। ना सिर्फ आंखों में मोटा काजल लगाया जाता है बल्की  पलकों पर भी आईलाईनर और मस्कारा लगाकर उन्हें विशेष रुप से उभारा जाता है।

Image source:Bollybreak.com


सिर पर सजाए जाने वाला मुकुट जिसे टियारा कहते है और माथे पर लगी लाल रंग की बड़ी बिंदी  दुल्हन के चेहरे की रौनक कई गुना बढ़ा देती है। बिपाशा बासु जो खुद बंगाल से ताल्लुक रखती है, "सोब चरित्रों काल्पोनिक" में लाल चुनरी डाले हुए बंगाली दुल्हन के रुप में नज़र आई, 


Image source:Reddif.com

तो वहीं जब वो रियल लाईफ़ में दुल्हन बनीं तो लाल रंग का लहंगा, माथा पट्टी, नथ पहने हुए और हाथों में पान सजाए हुए काफी खूबसूरत  लगी।
image courtesy:Happyshappy.com

बंगाली दुल्हन लुक  की बात हो तो वो ऐश्वर्या राय के बिना कैसे  पूरी हो सकती है भला।
बंगाली भाषा की फ़िल्म "चोखेर बाली" में ऐश्वर्या महरून रंग की बनारसी साड़ी पहनकर, हाथों में आल्ता लगाकर ऐश्वर्या काफी मासूम लग रही है।

Image courtesy :pinterest


फ़िल्म"देवदास" में हरे और लाल रंग की साड़ी और सिर पर नेट की चुनरी ओढ़कर, हाथों में बाहुबंध पहनकर,और कुंदन ज्वैेलरी पहने हुए ऐश्वर्या का लुक बंगाली दुल्हन के लिए किसी इन्सपिरेशन से कम नहीं है।
Image courtesy: Pinterest


Comments

Popular posts from this blog

चंदेरी साड़ी से चमकती बॉलीवुड हीरोइन्स

चंदेरी मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित ऐतिहासिक महत्व रखने वाला शहर है. चंदेरी नाम की ही साड़ियां यहां करीब सात सौ साल पहले बनाना शुरू की गई थी. यूं तो चंदेरी साड़ी का इतिहास पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि इन साड़ियों की परंपरा भगवान कृष्ण के भांजे शिशुपाल ने शुरू की थी. सिल्क और कॉटन के संगम से बनी इन साड़ियों पर फूल, पंछी, सिक्के, यहां तक की चेक और ब्लॉक प्रिंट भी देखने को मिलते हैं. इनकी सुनहरी बॉर्डर और पारदर्शी चमक इन्हें ख़ास पहचान देती है. हाथ से बुनी जाने वाली इन साड़ियों को बनाने वालों को उतना फायदा नहीं मिल पाता है, जितना मिलना चाहिए. इस वजह इस साड़ी कला के जारी रहने में मुश्किल नज़र आ रही है. बात बॉलीवुड की करें तो कई  हीरोइन्स ने चंदेरी साड़ी को पहनकर कई अवसरों पर शोभा बढ़ाई है. 1.करीना कपूर ने फिल्म थ्री इडियट्स के प्रमोशन के वक्त चंदेरी साड़ी पहनी थी, ताकि चंदेरी साड़ी बनाने वालो को प्रोत्साहन मिल सके. Image Source: Sareetimes.com                              ...

ग्लैमर जगत की सामाजिक कल्याण की प्रेरणा

Image source - www.facebook.com/DeepikaPadukone बॉलीवुड अभिनेत्रियां कभी अपने स्टाइल , लुक या फ़िल्मों को लेकर चर्चा में रहती है , लेकिन अपने पॉपुलर के चेहरे के अलावा वो खूबसूरत व्यक्तित्व भी रखती हैं.   जी हां बॉलीवुड में कई हीरोइन्स है जो   कि सामाजिक उत्तरदायित्वों का बखूबी   निर्वाह कर रही है। हम अपने लेख में उन अभिनेत्रियों के विषय में चर्चा करने जा   रहे हैं , जो सोशल वर्क से जुड़ी हुई हैं। Image source- m.facebook.com/DeepikaPadukone/ दीपिका पादुकोण जब डिप्रेशन की शिकार हुई और इस समस्या से जब उन्होंने निजात पाया तब उनको अहसास हुआ कि अवसाद भी   एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। अपने इंस्टाग्राम प्रोफाईल के जरिए दीपिका ने इस समस्या को रखा. एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू के मुताबिक "भारत की ९० प्रतिशत जनसंख्या   इस बात से अंजान है कि वो भावनात्मक और मानसिक रूप से कैसा महसूस कर रही है। वहीं कुछ अन्य लोग मानसिक स्वास्थ से जुड़ी भ्रांति के वजह से मदद नहीं लेेते है।   डिप्रेशन पर अन्य बीमारियों की तरह  ...

आज भी प्रासंगिक है महिला सशक्तिकरण पर बनीं ये फ़िल्में

        जब भी हम महिला सशक्तिकरण की बात करते है तो दामिनी, क्वीन, फैशन, पेज थ्री, पिंक, पिकू, कहानी, नो वन किल्ड जेसिका, इंग्लिश विंग्लिश, मर्दानी, जैसी फ़िल्में का नाम ज़हन में आता है। सचमुच इन फिल्मों में महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को बड़े ही सशक्त ढंग से उठाया गया है साथ ही ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रही है इन फ़िल्मों के अलावा कुछ ऐसी फ़िल्में भी है जिन्हें महिला प्रधान विषयों पर बनीं सदाबहार फिल्मों का दर्जा दिया जा सकता है जो अपने प्रर्दशन के सालों बाद भी प्रासंगिक है। अनपढ़- 60 के दशक में रिलीज़ इस फ़िल्म में माला सिन्हा ने लीड रोल निभाया था। इस फ़िल्म में इस मुद्दे को उठाया गया था कि एक लड़की की बिना पढ़ाए लिखाए अगर शादी कर दी जाती है तो उसे ज़िंदगी में कितनी मुसीबतों का सामाना करना पड़ता है। कभी कभी ना उसे अपने पति का प्रेम मिल पाता है ना वो सम्मान जो उसे अपने ससुराल मिलना चाहिए। अगर उसका पति उसे प्रेम करे भी तो उसके जीवित ना रहने के बाद एक स्त्री की क्या दशा हो जाती है इन्हीं मुद्दों के इर्द गिर्द ये फ़िल्म घुमती है...