Skip to main content

Posts

क्यों चांद छिपा बादल में ? : बॉलीवुड

इमेज सोर्स आयएमडीबी बात जब भी बॉलीवुड एक्ट्रेस की हो , तो ये माना जाता है कि अगर कोई बेहद खूबसूरत है तो उसके लिए फिल्म में चांस मिलना काफी आसान हो जाता है , ख़ासकर किसी हीरोइन के लिए , जाहिर सी बात है दर्शक भी एक खूबसूरत चेहरे को देखने के लिए बेताब रहते है। मधुबाला , श्रीदेवी , हेमामालिनी , ऐश्वर्या जैसी हीरोइन्स ना सिर्फ़ अपनी एक्टिंग स्किल के लिए जानी गई बल्कि इनकी खूबसूरती का जादू भी दर्शकों के सिर चढ़ कर बोला , किसी को बॉलीवुड की वीनस तो किसी को ड्रीमगर्ल के खिताब से नवाज़ा गया , यहां तक कि लोग अपने घरों की दीवार पर भी इन अभिनेत्रियों की तस्वीरें सजाते थे. आज हम अपने लेख में उन अभिनेत्रीयों की बात करेंगे जिनकी ख़ूबसूरती की जितनी भी तारीफ़ करे कम है उसके बावजूद भी बॉलीवुड में वो कोई ख़ास कमाल नहीं कर पाई। इमेज सोर्स इंस्टाग्राम अपने सहज अभिनय और स्वाभाविक सुंदरता के साथ लाखों दिलों पर राज करने वाली भाग्यश्री अपनी पहली ही फिल्म...

कहां गए फिल्मों से गांव ?

इमेज सोर्स- सिनेस्तान.कॉम एक दौर था जब ग्रामीण परिवेश पर बनीं फ़िल्में खूब पसंद   की जाती थी। तत्कालीन ग्रामीण भारत के स्वाभाविक चित्रण वाली फ़िल्म   मदर इंडिया तो ऑस्कर अवार्ड तक भारत की मिट्टी की खुशबू बिखेर आई। सिर्फ एक वोट कम पड़ने की वजह से ये फ़िल्म पीछे रह गई। फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी मारे गए गुल्फाम पर आधारित फिल्म तीसरी कसम , दो बीघा जमीन , उपकार , जैसी फिल्में उस दौर में बनीं जब खेती किसानी ही लोगों की आजीविका का साधन हुआ करता था और ज्यादातर लोग गांवों में ही रहा करते थे, इन फ़िल्मों में उस दौर के जीवन संघर्ष और गरीबी का वर्णन मिलता है। वहीं गंगा जमुना और मेरा गांव मेरा देश , शोले जैसी फिल्म में डकैती की समस्या को उठाया गया है। गुजरात की दुग्ध क्रांति पर बनीं स्मिता पाटिल अभिनीत फिल्म मंथन, डिंपल कपाड़िया की फिल्म रुदाली ग्रामीण परिवेश पर बनीं उत्कृष्ट फिल्मों में से एक है।  वहीं 80 के दशक में बनीं नदिया के पार हल्की फुल्की मनोरंजक प्रेम कथा है। आजादी के बाद भी काफी बड़ी संख्या में लोग   गांवों में रहा करते थे. शहरीकरण के चलते गांवो...