Skip to main content

आज भी प्रासंगिक है महिला सशक्तिकरण पर बनीं ये फ़िल्में

       

जब भी हम महिला सशक्तिकरण की बात करते है तो दामिनी, क्वीन, फैशन, पेज थ्री, पिंक, पिकू, कहानी, नो वन किल्ड जेसिका, इंग्लिश विंग्लिश, मर्दानी, जैसी फ़िल्में का नाम ज़हन में आता है। सचमुच इन फिल्मों में महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को बड़े ही सशक्त ढंग से उठाया गया है साथ ही ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रही है इन फ़िल्मों के अलावा कुछ ऐसी फ़िल्में भी है जिन्हें महिला प्रधान विषयों पर बनीं सदाबहार फिल्मों का दर्जा दिया जा सकता है जो अपने प्रर्दशन के सालों बाद भी प्रासंगिक है।


अनपढ़- 60 के दशक में रिलीज़ इस फ़िल्म में माला सिन्हा ने लीड रोल निभाया था। इस फ़िल्म में इस मुद्दे को उठाया गया था कि एक लड़की की बिना पढ़ाए लिखाए अगर शादी कर दी जाती है तो उसे ज़िंदगी में कितनी मुसीबतों का सामाना करना पड़ता है। कभी कभी ना उसे अपने पति का प्रेम मिल पाता है ना वो सम्मान जो उसे अपने ससुराल मिलना चाहिए। अगर उसका पति उसे प्रेम करे भी तो उसके जीवित ना रहने के बाद एक स्त्री की क्या दशा हो जाती है इन्हीं मुद्दों के इर्द गिर्द ये फ़िल्म घुमती है। कुल मिलाकार महिलाओं को शिक्षित करने का संदेश ये फ़िल्म देती है। ये फ़िल्म एक ऐसी महिला के संघर्ष की कहानी है जो विधवा हो जाने के बाद अपनी बेटी का लालन पालन खुद ही करती है और उसे काबिल बनाती है। इस फिल्म का गीत आपकी नज़रों ने समझा प्यार के काबिल मुझे काफी हिट हुआ था

मदर इंडिया- नर्गिस के बेहतरीन अभिनय से सजी ये फिल्म मातृत्व और कर्तव्य के सही मायने समझाती है। इस फिल्म का गीत दुनिया में हम आए है तो जीना ही पड़ेगा कठिनाईयों के बावजूद जीवन जीते रहने का संदेश देता है। इस फिल्म की नायिका अपने पति के जाने के बाद अपने बाल बच्चों को खुद मेहनत करके पालती और पोसती है यहां तक की खेतों में भी काम करती है। सूदखोरी  के काल में शोषणपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ उसका एक पुत्र बागी हो जाता है और अपहरण जैसी घटना को अंजाम देने वाला होता है तब एक मां अपने पुत्र प्रेम से बढ़कर नैतिक मूल्यों को चुनती है और अपने ही पुत्र को मार डालती है अंत में खुद को रोने से रोक नहीं पाती है।

आखिर क्यों –स्मिता पाटिल जैसी मंझी हुई अदाकारा के बेहतरीन अभिनय से सजी हुई इस फ़िल्म को महिला सशक्तिकरण की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाए तो गलत नहीं होगा इस फिल्म में राकेश रोशन ने स्मिता पाटिल के पति का किरदार अदा किया है जो उसकी ममेरी बहन (टीना मुनीम) के आकर्षण में उन्हें छोड़ देते है और इस फिल्म की नायिका उनके इस फैसले को स्वीकार कर लेती है साथ अपने पति के कहने पर अपनी बच्ची भी वहीं छोड़ जाती है, क्योंकि उनके माता पिता नहीं होते है ऐसे में फिल्म की नायिका को ज़िंदगी में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और महसूस होता कि समाज में लोग औरत के सम्मान को लेकर बातें तो बहुत करते है लेकिन इज्जत देना नहीं चाहते है, वो कठिन संघर्ष के बाद आत्मनिर्भर भी हो जाती है, लेकिन अपनी बेटी से दूर रहने का गम बर्दाश्त नहीं कर पाती और जीना नहीं चाहती है ऐसे में राजेश खन्ना जो गरीबी की वजह से अपनी मां को खो चुके है उन्हें अपनी जिंदगी की नई शुरूआत करने को कहते है और उन्हें एक कामयाब शख्सियत बनने में मदद करते है और शादी करने की इच्छा जताते है लेकिन वो इंकार कर देती क्योंकि वो एक मां भी है, राजेश खन्ना उनकी इच्छा को स्वीकार कर लेते है और इंतज़ार करना ठीक समझते है, कुछ सालों बाद उनके पहले पति की आर्थिक स्थिती खराब हो जाती है और वो अंजाने में ही स्मिता के पास चले जाते है और अपने उस रवैये के लिए माफी मांगते है जो सिर्फ औरत को स्टेटस सिंबल और आदमी की हर मांग पूरी करने वाली वस्तु मात्र समझता है। तब वो अपनी बेटी की शादी के लिए पैसा जुटाने के लिए उनका कंपनी के लिए काम करने को तैयार हो जाती है ताकि उनकी बेटी की शादी हो सके।
फिल्म के अंत के में टीना मुनीम के उन्हें माफी मिल जाने के सवाल पर राकेश रोशन कहते है कि कुछ पापों का कोई प्रायश्चित नहीं होता है, किसी का दुख किसी का सुख बन जाए तो इससे बड़ी गलत बात कुछ नहीं है। फिल्म के अंत में स्मिता पाटिल और राजेश खन्ना के सफेद हो चुके बालों में दिखाया गया है जिसमें राजेश खन्ना उनसे ये कहते है हुए शादी कर लेते है कि जिस समाज ने उनकी तकलीफों के बारे में कभी नहीं सोचा उनकी परवाह क्यों करना ? इस तरह से ये फिल्म एक सवाल खड़ा करती है कि सारे नियम आखिर एक औरत के लिए ही क्यों ? अचला नागर की बेहतरीन पटकथा और डायलॉग से सजी ये फिल्म सोचने पर मजबूर करती है। इस फिल्म का गीत दुश्मन ना करे दोस्त ने वो काम किया है काफी हिट हुआ था।

निकाह-

ट्रिपल तलाक पर बनीं इस फ़िल्म में बी आर चोपड़ा ने तलाक के महिला मन पर पड़ने वाले प्रभाव को बखूबी दिखाया था। इस फ़िल्म की कहानी भी अचला नागर ने लिखी थी। इस फिल्म में सलमा आगा ने मुख्य भूमिका निभाई थी जिसमें उनकी ज़िंदगी तब भूचाल आ जाता है जब गुस्से में आकार उनके पति (दीपक पाराशर) रोकने के बावजूद उनको तलाक देते है। उनकी शादी कहीं और हो जाती है फिर उनके पहले पति को अपनी गलती का पश्चाताप होता है और वो फिर से उसे अपनाना चाहते है उसके दूसरे पति राज बब्बर भी उसे कहते है कि अगर वो अपने पहले शौहर को अब भी प्यार करती है तो वो उन्हें तलाक देकर मुक्त कर सकते है तब वो कहती है कि वो एक औरत है कोई जायजाद नहीं, वो अपनी दूसरी शादी को तोड़ने से इंकार कर देती है और अपने दूसरे पति के साथ रहने का फैसला करती है। इस तरह एक महिला को भी अपनी ज़िंदगी के फ़ैसले लेने का अधिकार होना चाहिए इस फिल्म के ज़रिए ये संदेश दिया गया। इस फिल्म के गीत काफी सुपरहिट हुए थे।


पुराने ज़माने की ये फिल्में महिला सशक्तिकरण के मामले में मील का पत्थर है जो कि आज भी प्रासंगिक और नई पीढ़ी के लोगों को भी देखना चाहिए।



इमेज सोर्स- टम्बलर.कॉम

Comments

Popular posts from this blog

जब चिकनकारी से जुड़ा दिल का रिश्ता: बॉलीवुड अभिनेत्रियां

तहज़ीब  और अदब के शहर लखनऊ की शान चिकनकारी कला के दीवाने तो आप भी होंगे। कहा जाता है कि ये कढ़ाई कला मुगलकाल में काफी प्रचलित हुई । कहा जाता है कि ये कला ईरान से भारत आई है। इस कला में महीन कपड़े पर सुई धागे से कढ़ाई की जाती है। पुराने ज़माने में मलमल के कपड़ों पर चिकनकारी का वर्क हुआ करता था, लेकिन अब जॉर्जेट और शिफ़ान पर भी इसका काम होने लगा है। अपने लेख के ज़रिए हम आपको ये बताने जा रहे है कि किन किन बॉलीवुड डिवा ने इस परंपरागत कला की ड्रेस को पहनकर अपनी सुंदरता में चार चांद लगाए है। Image source: https://www.instagram.com/priyankachopra/                               हाल ही में प्रियंका चोपड़ा और उनके बॉयफ्रेंड निक जोनस की सगाई ना सिर्फ भारत बल्कि विश्वभर में चर्चा का विषय रही। प्रियंका हॉलीवुड में दस्तक देने के बाद इंटरनेशनल सेलिब्रिटी बन चुकी है लेकिन फिर भी उनका दिल है हिंदुस्तानी, अपनी सगाई के लिए उन्होंने पीले रंग की चिकनकारी शेरवानी पहनी जिसे अबू  जानी और संदी...

क्यों चांद छिपा बादल में ? : बॉलीवुड

इमेज सोर्स आयएमडीबी बात जब भी बॉलीवुड एक्ट्रेस की हो , तो ये माना जाता है कि अगर कोई बेहद खूबसूरत है तो उसके लिए फिल्म में चांस मिलना काफी आसान हो जाता है , ख़ासकर किसी हीरोइन के लिए , जाहिर सी बात है दर्शक भी एक खूबसूरत चेहरे को देखने के लिए बेताब रहते है। मधुबाला , श्रीदेवी , हेमामालिनी , ऐश्वर्या जैसी हीरोइन्स ना सिर्फ़ अपनी एक्टिंग स्किल के लिए जानी गई बल्कि इनकी खूबसूरती का जादू भी दर्शकों के सिर चढ़ कर बोला , किसी को बॉलीवुड की वीनस तो किसी को ड्रीमगर्ल के खिताब से नवाज़ा गया , यहां तक कि लोग अपने घरों की दीवार पर भी इन अभिनेत्रियों की तस्वीरें सजाते थे. आज हम अपने लेख में उन अभिनेत्रीयों की बात करेंगे जिनकी ख़ूबसूरती की जितनी भी तारीफ़ करे कम है उसके बावजूद भी बॉलीवुड में वो कोई ख़ास कमाल नहीं कर पाई। इमेज सोर्स इंस्टाग्राम अपने सहज अभिनय और स्वाभाविक सुंदरता के साथ लाखों दिलों पर राज करने वाली भाग्यश्री अपनी पहली ही फिल्म...

चंदेरी साड़ी से चमकती बॉलीवुड हीरोइन्स

चंदेरी मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित ऐतिहासिक महत्व रखने वाला शहर है. चंदेरी नाम की ही साड़ियां यहां करीब सात सौ साल पहले बनाना शुरू की गई थी. यूं तो चंदेरी साड़ी का इतिहास पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि इन साड़ियों की परंपरा भगवान कृष्ण के भांजे शिशुपाल ने शुरू की थी. सिल्क और कॉटन के संगम से बनी इन साड़ियों पर फूल, पंछी, सिक्के, यहां तक की चेक और ब्लॉक प्रिंट भी देखने को मिलते हैं. इनकी सुनहरी बॉर्डर और पारदर्शी चमक इन्हें ख़ास पहचान देती है. हाथ से बुनी जाने वाली इन साड़ियों को बनाने वालों को उतना फायदा नहीं मिल पाता है, जितना मिलना चाहिए. इस वजह इस साड़ी कला के जारी रहने में मुश्किल नज़र आ रही है. बात बॉलीवुड की करें तो कई  हीरोइन्स ने चंदेरी साड़ी को पहनकर कई अवसरों पर शोभा बढ़ाई है. 1.करीना कपूर ने फिल्म थ्री इडियट्स के प्रमोशन के वक्त चंदेरी साड़ी पहनी थी, ताकि चंदेरी साड़ी बनाने वालो को प्रोत्साहन मिल सके. Image Source: Sareetimes.com                              ...